#यह आदिवासियों के साथ बहुत बड़ी साजिश है?

अब आरक्षण इस तरह लागू होगा। छोटे छोटे डिपार्टमेंट होंगे जिनमें कभी 14 सीट नहीं होंगी यानी ST के लिए आरक्षण ख़त्म। सुप्रीम कोर्ट ने आपके साथ खेल कर दिया है, आदिवासी समुदाय के जनप्रतिनिधियों की नींद खुल जाए तो उन्हें बता देना।

#सभी विश्वविद्यालय मे विभागवार आरक्षण लागु होगा|

आज दिल्ली विश्वविद्यालय में 13 पॉइंट रोस्टर का प्रखर विरोध किया गया। लेकिन आदिवासियों की उपस्थिति नाम मात्र रही।@hanumat meena

#सुप्रीम कोर्ट का विसंगतिपूर्ण फैसला…

सुप्रीम कोर्ट ने 200 पॉइंट रोस्टर प्रणाली के लिए दायर याचिका को ख़ारिज कर दिया है। अब 13 पॉइंट रोस्टर के हिसाब से कॉलेज/ विश्विद्यालय में शिक्षकों की नियुक्ति में आरक्षण लागू करना पड़ेगा।

आपको 200 पॉइंट रोस्टर और 13 पॉइंट रोस्टर प्रणाली से लागू होने वाले आरक्षण में अंतर को समझना चाहिए।

समझने वाली बात यह हैं कि 13 पॉइंट रोस्टर के अनुसार #विभागीय आधार पर आरक्षण दिया जायेगा जिसके अंतर्गत सभी वर्गों को आरक्षण तभी मिलेगा जब विभाग में न्यूनतम 14 पद हो।

प्रथम 1-3 पद अनारक्षित, चौथा पद ओबीसी, 5-6 पद फिर से अनारक्षित, 7वाँ पद अनुसूचित जाति, 8वां पद ओबीसी, फिर 9-10-11 नंबर का पद अनारक्षित, 12वां पद ओबीसी, 13वां पद अनारक्षित और 14वां नंबर अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं।

साधारण भाषा में कहे तो 14वां पद आदिवासियों के लिए आरक्षित होता हैं। क्योकि अधिकांश विभाग इतने बड़े नही होते कि दलित और आदिवासियों का नंबर आये और यदि एक बार आ गया तो आदिवासियों का अगला नंबर दशकों बाद आएगा।

200 पॉइंट रोस्टर प्रणाली में किसी #कॉलेज_विश्विद्यालय को एक यूनिट/ इकाई मानकर आरक्षण लागू किया जाता है। उस संस्था की समस्त अध्यापकों की संख्या पर आरक्षण लागू किया जाता है।

जैसे किसी कॉलेज/ विश्विद्यालय में 100 अध्यापक है तो उसमें लगभग 27 अध्यापक OBC कैटेगिरी, 12-13 अध्यापक SC कैटेगिरी तथा 7-8 अध्यापक ST कैटेगिरी से नियुक्त किये जायेंगे।

200 पॉइंट रोस्टर प्रणाली से आरक्षण लागू नहीं होने से एक तरह से उच्च शिक्षा में वंचित तबकों का प्रतिनिधित्व न्यून हो जायेगा। संविधान का सीधा-सीधा उल्लंघन माना जायेगा।

भारत सरकार से अनुरोध है कि वंचित तबके के हितों को ध्यान में रखकर अध्यादेश लेकर आये और 200 पॉइंट रोस्टर के हिसाब से आरक्षण लागू करे।

भारतीय संविधान की प्रस्तावना में लिखित “…समस्त नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय…” बहुजनो के संदर्भ में आज एक भद्दा मजाक या ये कहे की एक गाली लग रही हैं। बाबा साहेब भीम राव आंबेडकर, जयपाल सिंह मुंडा ने क्या इसी दिन के लिए ये लड़ाई बहुजनो के लिए लड़ी थी ?

13 पॉइंट रोस्टर का पूरा असर आदिवासियों के ऊपर पड़ेगा। आदिवासियों को अपने 7.5% आरक्षण का पूर्ण लाभ लेने के लिए अगले 200 वर्षों तक इंतजार करना पड़ेगा। दलितों को अपने 15% के लिए अगले 100 वर्षो का इंतज़ार करना होगा वही ओबीसी को अपने 27% आरक्षण का पूर्ण लाभ लेने के लिए लगभग 50 साल और इंतज़ार करना पड़ेगा।

आज बहुजन समाज वहां पर आके खड़ा हो गया जहाँ से फुले-अंबेडकर-जयपाल सिंह मुंडा ने अपने हक़ की लड़ाई आरंभ की थी।

#Restore200PointRoster

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने पिछले साल 18 जुलाई क आदेश जारी कर देश के सभी

सरकारी विश्वविद्यालय में नियुक्ति पर रोक लगा दी थी। यूजीसी ने अपने आदेश में कहा था कि सुरक्षित करने के लिए मंत्रालय जरूरी कदम उठाएगा।

#यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार अध्यादेश लाकरसुप्रीमकोर्टके फैसले को पलटेगी?

मानव संसाधन विकास मंत्रालयके अधिकारी ने कहाकि चूंकि बजट सत्र की घोषणा पहले ही जारी की जा चुकी है ऐसे में अध्यादेश नहलाया जा सकता है|

#मीणा समाज के लोगो का क्या कहना है…

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