आज हम बता रहे उन मुख्य तथ्यों के बारे मे जो मीणा जाती से जुड़े है और जैसा कि आप जानते है पिछली पोस्ट मे हमने बताया था मीणा जाती से सम्बंधित बुक्स के बारे जिसे आप लोगो ने खूब प्यार दिया उसके लिये आप सब को धन्यवाद,ऐसी ही प्यार देते रहे,हम आगे भी मीणा जाती से सम्बंधित पोस्ट लाते रहेंगे|

पोस्ट को शेयर व कमैंट्स जरूर करे और News10 का फेसबुक पेज भी लाइक करे,धन्यवाद|

यह भी पढ़े :जानिए,पन्ना मीणा की बावड़ी का इतिहास,जहाँ मीणाओ की लासे बिछा दी गयी|

#तथ्य नम्बर 1

प्राचीन समय मे मीणा राजा आलन सिंह ने,एक असहाय राजपूत माँ और उसके बच्चे को उसके दायरे में शरण दि,बाद में मीणा राजा ने बच्चे, ढोलाराय को दिल्ली भेजा गया,मीणा राज्य का प्रतिनिधित्व करने के लिए,राजपूत ने इस एहसान के आभार मे राजपूत सणयन्त्रकारिओ के साथ आया और दीवाली पर निहत्थे मीनाओ कि लासे बिछा दि,जब वे पितृ तर्पण रस्मे कर रहे थे,और इस प्रकार कछवाहा राजपूत ने खोगओन्ग पर विजय प्राप्त की थी,और यह इनकी सबसे कायर हर्कत थी जो राजस्थान के इतिहास में शर्मनाक है|

यह भी पढ़े :10 किताब जो मीणा जनजाति का इतिहास दर्शाती है|

#तथ्य नम्बर 2

एम्बर के कछवाहा राजपूत शासक भारमल हमेशा मीणा राज्य पर हमला करता था, लेकिन बहादुर मीणा के खिलाफ सफल नहीं हो सका,फिर अकबर ने राव बडा मीणा को कहा था,अपनी बेटी कि शादी उससे करने के लिए,लेकिन राव बडा मीणा झुका नहीं, बाद में भारमल ने अपनी बेटी जोधा की शादी अकबर से कर दि,तब अकबर और भारमल की संयुक्त सेना ने बड़ा हमला किया और मीना राज्य को नष्ट कर दिया और मीनाओ का खजाना अकबर और भारमल के बीच बाट लिया गया,और उस खजाने को भारमल ने एम्बर के पास जयगढ़ किले मे रखा गया था|

यह भी पढ़े :10 मोटिवेशन कोट्स,जो आपकी ज़िन्दगी बदल कर रख देंगे|

#तथ्य नम्बर 3

कर्नल जेम्स- टॉड के अनुसार कुम्भलमेर से अजमेर तक की पर्वतीय श्रृंखला के अरावली अंश परिक्षेत्र को मेरवाड़ा कहते है,कई इतिहासकारों की राय है कि मेर शब्द से मेरवाड़ा बना है, यहां सवाल खड़ा होता है कि क्या मेर ही रावत है,कई इतिहासकारो का कहना है कि किसी समय यहां विभिन्न समुदायो के समीकरण से बनी ‘रावत’ समुदाय का बाहुल्य रहा है जो आज भी है

यह भी पढ़े :10 कारण जिनकी वजह से आप दिन के 12 घंटे बर्बाद करते है

#तथ्य नम्बर 4

यह समुदाय परिस्थितियों और समय के थपेड़ों से संघर्ष करती है,और यह कतिपय झुंझारू समुदायों से बना एक समीकरण है,इतिहासकारो का मानना है कि मीणा एक बड़ा वर्ग है रावतों मे|

यह भी पढ़े :10 ज्यादा वेतन देने वाली सरकारी नौकरी, डिफेंस सर्विस दूसरे स्थान पर|

लेकिन रावत समाज में तीन वर्ग पाये जाते है|

1. रावत भील

2. रावत मीणा और

3. रावत राजपूत

रावत और राजपूतो में परस्पर विवाह सम्बन्ध के उदाहरण मुश्किल से हि मिल पाएंगे,जबकि रावतों और मीणाओ के विवाह होने के अनेक उदाहरण आज भी है|

यह भी पढ़े :जानिए,मीणा राजाओ द्वारा निर्मित प्रमुख किले,प्रमुख बावड़िया एवं प्रमुख मन्दिर व राज्य|

#तथ्य नम्बर 5

महाभारत के काल का मत्स्य संघ की प्रशासनिक व्यवस्था लौकतान्त्रिक थी,जो मौर्यकाल में छिन्न- भिन्न हो गयी और इनके छोटे-छोटे गण ही आटविक (मेवासा ) राज्य बन गये,राजस्थान व गुजरात के आटविक राज्य मीना और भीलो के ही थे इस प्रकार से वर्तमान ढूंढाड़ प्रदेश के मीना राज्य विकसित आटविक राज्य थे ।

यह भी पढ़े :भारत के 10 खूबसूरत बस स्टेशन,वडोदरा पहले स्थान पर||

#तथ्य नम्बर 6

हनुमानगढ़ के सुनाम कस्बे में मीनाओं के आबाद होने का उल्लेख आया है कि सुल्तान मोहम्मद तुगलक ने सुनाम व समाना के विद्रोही जाट व मीनाओ के संगठन को नष्ट करके मुखियाओ को दिल्ली लेजाकर मुसलमान बना दिया,इससे स्पष्ट है कि मीना प्राचीनकाल से सरस्वती के अपत्यकाओ में गंगा नगर हनुमानगढ़ एवं अबोहर- फाजिल्का मे आबाद थे|

यह भी पढ़े :भारत के 10 शिक्षित राज्य,दिल्ली 9वे स्थान पर|

#तथ्य नम्बर 7

रावत एक उपाधि थी जो महान वीर योध्दाओ को मिलती थी वे एक तरह से स्वतंत्र शासक होते थे यह उपाधि मीणा,भील व अन्य को भी मिली थी,मेरातो को भी यह उपाधिया मिली थी जो सम्मान सूचक मानी जाती थी,मुस्लिम आक्रमणो के समय इनमे से काफी को मुस्लिम बनाया गया इसलिए मेर मेरात मेहर मुसमानो मे भी है,17 जनवरी 1917 में मेरात और रावत सरदारो की राजगढ़ (अजमेर)में महाराजा उम्मेद सिह शाहपूरा,भीलवाड़ा और श्री गोपाल सिह खरवा की सभा मेँ सभी लोगो ने मेर मेरात मेहर की जगह रावत नाम धारण किया,इसके प्रमाण के रूप में 1891 से 1921 तक के जनसंख्या आकड़े देखे जा सकते है 31 वर्षो मे मेरो की संख्या में 72% की कमी आई है वही रावतो की संख्या में 72% की बढोत्तर हुई है,गिरावट का कारण मेरो का रावत नाम धारण कर लेना है ।

यह भी पढ़े :भारत की 10 सबसे बड़ी यूनिवर्सिटी,दिल्ली यूनिवर्सिटी सातवे स्थान पर||

#तथ्य नम्बर 8

सिंघुघाटी के प्राचीनतम निवासी मीणाओ का अपनी शाखा मेर महर के निकट सम्बन्ध पर प्रकाश डालते हुए कहा जा सकता है कि सौराष्ट्र(गुजरात)के पश्चिमी काठियावाड़ के जेठवा राजवंश का राजचिन्ह मछली के तौर पर अनेक पूजा स्थल थे,आज भी देखा जा सकता है इतिहासकार जेठवा लोगो को मेर महर, रावतसमुदाय का माना जाता है,जेठवा मेरों की एक राजवंशीय शाखा थी जिसके हाथ में राजसत्ता होती थी,और कर्नल टॉड ने मेरों को मीना समुदाय का एक भाग माना है,और आज भी पोरबंदर काठियावाड़ के महर समाज के लोग उक्त प्राचीन राजवंश के वंशज मानते है अतः हो ना हो गुजरात का महर समाज भी मीणा समाज का ही हिस्सा है,इस प्राचीन आदिम निवासियों की सामुद्रिक दक्षता देखकर मछलि ध्वजधारी लोगों को नवांगुतक द्रविड़ो ने मीना या मीन नाम दिया था,और हिमाचल में मेन(मीना) लोगो का राज्य था व स्कन्द में शिव को मीनाओ का राजा मीनेश कहा गया है,हैरास सिन्धुघाटी लिपी को प्रोटो द्रविड़ियन माना है उनके अनुसार भारत का नाम मौहनजोदड़ो के समय सिद था इस सिद देश के चार भाग थे जिनमें एक मीनाद अर्थात मत्स्य देश था । फाद हैरास ने एक मोहर पर मीना जाती का नाम भी खोज निकाला और उनके अनुसार मोहनजोदड़ो में राजतंत्र व्यवस्था थी,अतः कहा जा सकता है कि मीना जाति का इतिहास बहुत प्राचीन है|

यह भी पढ़े :भारत के 10 सबसे बड़े डॉक्टर,जो भगवान से कम नहीं है|

#तथ्य नम्बर 9

आज की तारीख में 10-11 हजार मीणा लोग फौज में है,बुदी का उमर गांव पूरे देश मे एक अकेला मीणो का गांव है जिसमें 7000 की जनसंख्या मे से 2500 फौजी है टोंक बुन्दी जालौर सिरोहि मे से मीणा लोग बड़ी संख्या मे फौज मे है,और उमर गांव के लोग प्रथम व द्वीतिय विश्व युध्द लड़कर शहीदहुए थे|

शिवगंज के नाथा व राजा राम मीणा को उनकी वीरता पर उस समय का परमवीर चक्र जिसे विक्टोरिया चक्र कहते थे मिला था जो उनके वंशजो के पास है,देश आजाद हुआ तब तीन मीणा बटालियने थी पर दुर्भाग्यवंश खत्म कर दी गई थी|

यह भी पढ़े :विश्व के 10 सबसे खतरनाक कुत्ते,डोबरमैन 4थे स्थान पर|

#तथ्य नम्बर 10

तूंगा (बस्सी) के पास जयपुर नरेश प्रतापसिंह और माधजी सिन्धिया मराठा के बीच 1787 मे जो स्मरणिय युध्द हुआ था,जिसमे प्रमुख भूमिका मीणाओ की रही है,जिसमे मराठे इतिहास मे पहली बार जयपुर के राजाओ से प्राजित हुए थे वो भी मीणाओ के कारण इस युध्द में राव चतुर और पेमाजी की वीरता प्रशंसनीय रही,जिन्होंने चार हजार मराठो को परास्त कर मीणाओ मे अपना नाम अमर कर दिया |

यह भी पढ़े :भारत के 10 सबसे खूबसूरत पुल(bridge),हावड़ा सातवे स्थान पर|

Advertisements

Published by Newst10

Newst10 मे आपका स्वागत है,newst10 का पूरा नाम news top 10 है, यहा आपको देश-विदेश से जुडी टॉप 10 खबरे पढ़ने को मिलेगी,और अगर आपको पोस्ट अच्छी लगी हों तो पोस्ट को like,comment व share जरूर करे, धन्यवाद !

Join the Conversation

7 Comments

Leave a comment

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

%d bloggers like this: